Shri Shani Dev Chalisa

Shri Shani Dev Chalisa is a powerful devotional hymn dedicated to Lord Shani,
the divine judge of karma and the dispenser of justice in Hindu belief.
Lord Shani is known for influencing the results of one’s actions and guiding individuals towards discipline,
truth, and righteousness.Devotees recite Shani Chalisa to reduce the malefic effects of Shani dosha,
seek protection from hardships, and gain strength to overcome life’s challenges.
Chanting this Chalisa with faith is believed to bring stability, patience, and positive transformation.
Shri Shani Dev Maharaj

Shri Shani Dev Chalisa

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥
सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥
रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥
रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥
तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

Meaning and Significance of Shani Dev Chalisa

English: Shani Dev Chalisa describes the greatness of Lord Shani, who is considered the karmic judge in Hindu mythology.
He rewards good deeds and punishes wrong actions, guiding individuals towards righteousness and discipline.
This Chalisa highlights that Lord Shani is not a negative force but a teacher who helps people learn from their karma.
Devotees who sincerely pray to Shani Dev can overcome difficulties and achieve stability in life.
मराठी: शनि देव चालीसा मध्ये भगवान शनीदेवांच्या महिमेचे वर्णन केले आहे.
शनीदेव हे कर्मानुसार फळ देणारे देवता मानले जातात आणि ते व्यक्तीला शिस्त, सत्य आणि योग्य मार्गावर चालण्याची प्रेरणा देतात.
हे स्तोत्र आपल्याला शिकवते की शनीदेव हे फक्त दंड देणारे नसून जीवन सुधारण्यासाठी मार्गदर्शन करणारे गुरु आहेत.
हिंदी: शनि देव चालीसा में भगवान शनि की महिमा का वर्णन किया गया है, जो कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता माने जाते हैं।
वे व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का न्याय करते हैं और जीवन में अनुशासन और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
इस चालीसा के माध्यम से यह बताया गया है कि शनि देव दंड देने वाले ही नहीं बल्कि जीवन को सुधारने वाले गुरु भी हैं।

Benefits of Chanting Shani Dev Chalisa

English:
• Reduces effects of Shani dosha
• Helps overcome obstacles and hardships
• Brings discipline and stability
• Protects from negative influences
• Improves patience and mental strength
मराठी:
• शनि दोष कमी करण्यास मदत होते
• अडथळे आणि संकटे दूर होतात
• जीवनात स्थिरता आणि शिस्त येते
• नकारात्मक शक्तींपासून संरक्षण मिळते
• धैर्य आणि मानसिक ताकद वाढते
हिंदी:
• शनि दोष के प्रभाव को कम करता है
• बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करता है
• जीवन में स्थिरता और अनुशासन लाता है
• नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है
• धैर्य और मानसिक शक्ति बढ़ाता है

When and How to Recite Shani Dev Chalisa

English: Shani Dev Chalisa is best recited on Saturdays, which is dedicated to Lord Shani.
Devotees can chant it in the morning or evening after lighting a lamp and offering prayers.
It is recommended to recite with sincerity and faith, especially during Shani Sade Sati or difficult phases of life.
मराठी: शनि देव चालीसाचे पठण शनिवारच्या दिवशी करणे अत्यंत शुभ मानले जाते.
सकाळी किंवा संध्याकाळी दीप लावून भक्तिभावाने हे स्तोत्र म्हणावे.
साडेसाती किंवा कठीण काळात याचा जास्त लाभ होतो असे मानले जाते.
हिंदी: शनि देव चालीसा का पाठ शनिवार के दिन करना विशेष शुभ माना जाता है।
भक्त इसे सुबह या शाम दीपक जलाकर श्रद्धा से पढ़ सकते हैं।
विशेष रूप से साढ़े साती या कठिन समय में इसका पाठ लाभकारी माना जाता है।

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